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मिस्र का खोया हुआ गोल्डन शहर- जाने इस शहर के बारे में एवं इस शहर का महत्त्व

हाल में तीन हजार वर्ष पुराने 18वें राजवंश के राजा अमेनहॉटेप III जिन्होंने प्राचीन मिस्र पर 1391 से 1353 ई. पू. तक राज्य किया, के युग से खोया हुआ गोल्डेन शहर मिस्र में लक्जर के दक्षिणी प्रांत में खोजा गया है।

खोये हुए गोल्डेन शहर या सोने की शहर के बारे में :


यह नया खोजा गया शहर नील नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित है। यह लगभग 100 वर्ष पूर्व किंग तूतनखामुन की कब्र की खोज के बाद से सबसे महत्वपूर्ण खोज है।इसे प्राचीन मिस्र का पोम्पोई कहा जाता है क्योंकि फारोह के शासनकाल से मिट्टी के ईंट वाले मकान, कलाकृतियां और उपकरणों की खोज की गई है। मिस्र की प्राचीन वस्तुओं के मंत्रालय के अनुसार, एक बेकरी, भट्टी और भंडारण पात्र शहर के दक्षिणी हिस्से में पाए गए हैं. जबकि उत्तरी हिस्सा- जिसका पूरी तरह से उत्खनन अभी भी बाकी है- में प्रशासनिक और आवासीय जिले शामिल हैं ।
Picture Source : Kawa-news.com

खोये हुए गोल्डेन शहर या सोने की शहर के महत्त्व :


कहा जाता है कि पुरातत्वविदों ने शहर की दीवारों और यहां तक कि दैनिक जीवन में प्रयोग किये जाने वाले बर्तनों के साथ भरे हुए कमरों की खोज की। उन्होंने शराब के बर्तनों की मिट्टी के ढक्कन, छल्लों, ताबीजों, रंगीन मृदभाड़ और तकली और बुनने वाले उपकरणों की भी खोज की मिट्टी के ईंट जिनका खोज की गई पर तूतनखामून के दादा राजा अमेनहॉटेप III की मुहर लगी हुई है। इन्हें मिस्र के सबसे शक्तिशाली फारोह में से एक माना जाता था। इस स्थल में बड़ी संख्या में भट्टियां और चूल्हें है जिससे ग्लास और फेएंस का निर्माण किया जाता था। साथ ही हजारों मूर्तियों के ढेर भी पाए गए हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस शहर का प्रयोग तूतनखामून और उसके उत्तराधिकारियों द्वारा उस काल के दौरान किया जाता था जिसे प्राचीन मिस्र का स्वर्ण युग कहा जाता है।

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